पितृ पक्ष क्या है?

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह 16 दिन का विशेष काल होता है जिसमें अपने पूर्वजों (पितरों) की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। मान्यता है कि इन दिनों में हमारे पितर धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से तर्पण व अन्न-जल ग्रहण करते हैं।

जो व्यक्ति श्रद्धा भाव से श्राद्ध करता है, उसके घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

हिंदू धर्म में पितरों का स्मरण और उनका आशीर्वाद लेना बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। हर साल भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) मनाया जाता है। इस अवधि में लोग अपने पूर्वजों को श्रद्धा अर्पित करते हैं, उनका तर्पण और पिंडदान करते हैं ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले और परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहे।

पितृ पक्ष 2025 की तिथियां

👉 पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत: 7 सितंबर 2025 (रविवार )
👉 पितृ पक्ष 2025 का समापन (सर्वपितृ अमावस्या): 21 सितंबर 2025 (रविवार)

इस पूरे 15 दिनों की अवधि में अलग-अलग तिथियों पर अलग-अलग पितरों (जैसे माता-पिता, भाई-बहन, गुरु आदि) के लिए श्राद्ध किया जाता है।

पितृ पक्ष का महत्व

1.मान्यता है कि इस समय पितरों की आत्माएँ धरती पर अपने वंशजों से आशीर्वाद देने आती हैं।

2.श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि, संतति और शांति बनी रहती है।

3.जो लोग इस अवधि में अपने पितरों को याद करते हैं, उन्हें जीवन में सफलता और पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

4.पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है।

5.यह माना जाता है कि पितर संतुष्ट होकर वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।

6.परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

7.हमारे पाप और दोष कम होते हैं।

8.पितरों के आशीर्वाद से संतान सुख, स्वास्थ्य और सफलता मिलती है।

श्राद्ध विधि: चरणबद्ध विवरण

  1. प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।

  2. पितरों का आह्वान करके जल, तिल और कुशा से तर्पण करें।

  3. भोजन में खासकर खीर, पूड़ी, कचौड़ी, उड़द दाल, लौकी, और पितरों को प्रिय पकवान बनाए जाते हैं।

  4. ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दें।

  5. गौ, कुत्ते, कौवे और चींटियों को भोजन खिलाना भी श्राद्ध का हिस्सा माना जाता है।

तर्पण विधि और महत्व

  • तर्पण का अर्थ है जल अर्पण करना।

  • इसमें तिल और कुशा मिलाकर पितरों को जल अर्पित किया जाता है।

  • तर्पण करने से पितरों की आत्मा को तृप्ति और शांति मिलती है।

  • सामान्यतः इसे नदी, तालाब या पवित्र स्थान पर किया जाता है।

पितृ पक्ष के नियम और सावधानियाँ

  • इन दिनों मांस, शराब, प्याज, लहसुन का सेवन न करें।

  • दूसरों का अनादर न करें।

  • पितरों का नाम स्मरण करते हुए तर्पण करें।

  • ब्राह्मण, गौ, कौवा, कुत्ता और चींटियों को अन्न अर्पित करें।

  • श्राद्ध हमेशा दिन के मध्य भाग (मध्याह्न काल) में करें।

  • श्राद्ध करने वाला व्यक्ति सात्विक और संयमी रहे।

पिंडदान का महत्व

  • पिंडदान का अर्थ है आटे के गोलों (पिंड) के साथ तिल, जौ और कुशा अर्पित करना।

  • यह माना जाता है कि पिंडदान से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • खासकर गया (बिहार), प्रयागराज, वाराणसी, उज्जैन और गया घाट पिंडदान के लिए अत्यंत पवित्र स्थान माने जाते हैं।

किस दिन कौन-सा श्राद्ध करना चाहिए

  • पूर्णिमा से चतुर्दशी तक: अलग-अलग तिथियों पर माता, पिता, भाई, बहन, गुरु और रिश्तेदारों के लिए श्राद्ध किया जाता है।
  • सर्वपितृ अमावस्या (21 सितंबर 2025): इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो।

पितरों को प्रसन्न करने के उपाय

  1. प्रतिदिन तिल और जल का तर्पण करें।

  2. कौओं को भोजन अवश्य कराएँ।

  3. ब्राह्मण को भोजन कराने से पितर प्रसन्न होते हैं।

  4. जरूरतमंदों की मदद करें।

  5. गाय को हरा चारा और जल अर्पित करें।

पितृ पक्ष में क्या करें और क्या न करें (Do’s & Don’ts)

✅ क्या करें:

  • पितरों का नाम लेकर तर्पण और पिंडदान करें।

  • ब्राह्मण को भोजन और दान अवश्य दें।

  • गौ, कौआ, कुत्ते और चींटियों को अन्न खिलाएँ।

  • सात्विक और पवित्र भोजन करें।

❌ क्या न करें:

  • मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से परहेज करें।

  • किसी का अपमान न करें।

  • इस अवधि में विवाह, उत्सव या मांगलिक कार्य न करें।

पितृ पक्ष से जुड़ी मान्यताएँ

  • कहा जाता है कि यदि श्राद्ध न किया जाए तो पितर नाराज हो जाते हैं और जीवन में बाधाएँ आती हैं।

  • इस अवधि को महालया भी कहा जाता है।

  • महाभारत के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत भीष्म पितामह ने की थी।

पितरों के आशीर्वाद से मिलने वाले लाभ

  1. परिवार में सुख-समृद्धि आती है।

  2. संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं।

  3. पितृ दोष का निवारण होता है।

  4. जीवन में मानसिक शांति और समृद्धि बढ़ती है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

Q1. पितृ पक्ष क्यों मनाया जाता है?
👉 अपने पूर्वजों की आत्मा को शांति देने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए।

Q2. पिंडदान कहाँ करना सबसे श्रेष्ठ है?
👉 गया (बिहार), प्रयागराज, वाराणसी, उज्जैन आदि स्थान पर।

Q3. अगर किसी को मृत्यु तिथि याद न हो तो श्राद्ध कब करें?
👉 सर्वपितृ अमावस्या (21 सितंबर 2025) को।

Q4. क्या पितृ पक्ष में हर कोई श्राद्ध कर सकता है?
👉 हाँ, पुत्र, पौत्र, या परिवार का कोई भी सदस्य कर सकता है।

Q5. क्या पितृ पक्ष में शादी या नया घर लेना शुभ है?
👉 नहीं, पितृ पक्ष में किसी भी मांगलिक कार्य की अनुमति नहीं होती।

Q6. पितृ पक्ष 2025 कब से कब तक है?
➡️ 7 सितम्बर से 21 सितम्बर 2025 तक।

Q7. पितृ पक्ष में क्या नहीं करना चाहिए?
➡️ मांस, शराब, लहसुन-प्याज का सेवन न करें, अपशब्द न बोलें, ब्राह्मण का अपमान न करें।

Q8. श्राद्ध किस समय करना चाहिए?
➡️ मध्याह्न काल (दोपहर से पहले का समय) श्राद्ध के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

Q9. अगर श्राद्ध न करें तो क्या होता है?
➡️ मान्यता है कि पितर अप्रसन्न हो जाते हैं और घर-परिवार में परेशानियाँ आ सकती हैं।

Q10 . श्राद्ध के दिन क्या दान करें?
➡️ अन्न, वस्त्र, दक्षिणा, तिल और जल का दान करना शुभ माना जाता है।

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